गुरुवार, 23 जुलाई 2009


1 टिप्पणी:

राकेश 'सोऽहं' ने कहा…

आदरणीय नीरव जी,
रात में सोने के पहले किताबें और पत्रिकाएं पढ़ना और फुर्सत में इन्टरनेट पर साहितिक ब्लॉग को पढ़ना मेरी रूचि का हिस्सा हैं .
मैं सुरेश 'नीरव (ब्लॉग) को एक श्रेष्ठ साहित्यिक इलेक्ट्रॉनिक किताब के रूप में देखता हूँ और पढ़ते रहना चाहता हूँ .
एक ऐसा ब्लॉग जिसमें केवल और केवल सुरेश 'नीरव की ही रचनाएँ हों .
हर क्लिक पर नीरव की ही रचना हो और हर बार उस रचना पर तुंरत अपनी प्रतिक्रिया दे सकूं यह खूबी इन्टरनेट पर ही है साधारण किताब को पढ़ने में नहीं है. आप चाहें तो उस रचना के कमेंट्स में जाकर प्रतिक्रिया कर्ता को अपने आशीर्वाद - शब्द दें .
यह विचार मेरे अपनें हैं, कृपया अन्यथा न लें.

हाँ लोकमंगल को सुरेश नीरव से जोड़ दें बस .
शेष, आपका अनुभव ज्यादा है और सर्वोपरि भी . नई ग़ज़ल के लिए फिर से बधाई .
आपका ही
[] राकेश 'सोऽहं'